भोपाल में पुलिसकर्मी की बेटी की हत्या: दोस्त ही निकला कातिल

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हत्या
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भोपाल में पुलिसकर्मी की बेटी की हत्या कर दी गई। गुरुवार दोपहर को ज्यूडिशियल अकादमी के पास जंगल मे लड़की की लाश मिली थीI पुलिस की जाँच में पता चला है, कि लड़की के दोस्त ने ही हत्या की हैI

 घटना रातीबड़ पुलिस थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार भदभदा डैम के पास पुलिस चौकी से करीब 150 मीटर दूर एक छात्रा का शव मिला है जिसके गले में चाकू से हमले के निशान मिले हैंI मृतका की पहचान नेहरू नगर पुलिस लाइन में रहने वाली 18 वर्षीय निकिताशा चौहान के रूप में हुई जो बीए फर्स्ट इयर की स्टूडेंट थी।

दोस्त ही निकला कातिल

पुलिस सूत्रों के अनुसार छात्रा निकिताशा और आरोपी  (यश तिवारी)  की दोस्ती लगभग चार साल से थी। गुरुवार सुबह वह यश तिवारी के साथ आखिरी बार देखी गई थी। पुलिस ने जब यश को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने छात्रा की हत्या करना स्वीकार कर लिया।

 आरोपी नेहरू नगर में रहता हैI निकिताशा की हत्या के बाद आरोपी आत्महत्या करना चाहता था। इसके लिए वह भदभदा डैम क्षेत्र पहुंचा था लेकिन वहां उसे संदिग्ध अवस्था में देखने पर किसी ने पुलिस में खबर कर दीI

थाना गौतम नगर में हेड कांस्टेबल है, मृतका के पिता

पुलिस थाना गौतम नगर से मिली जानकारी के अनुसार उमेश चौहान, थाने में हेड कांस्टेबल  के पद पर कार्यरत हैं। वह पिछले दो सप्ताह से छुट्‌टी पर चल रहे थे उन्होंने अमरनाथ यात्रा के लिए छुट्‌टी ली थी। वह यात्रा से कुछ समय पहले ही भोपाल लौटे हैंI

बीते साल ही पास की थी, हायर सेकंडरी की परीक्षा   

 उन्होंने बताया कि निकिताशा ने बीते साल उन्ही के स्कूल से हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास की थी और पढाई में अच्छी थी निकिताशाI आरोपी यश का स्कूल में दाखिला निकिताशा की सिफारिश से ही हुआ थाI

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RUPALI SHUKLA
नमस्कार मेरा नाम रुपाली शुक्ला है, मैंने कानपुर विश्वविद्यालय से परास्नातक किया हैI बचपन से लेखन के प्रति रुझान आज मेरी आय क स्रोत बन सका, किताबें पढना मेरा मनपसंद कार्य है, कहानियां,कवितायेँ उपन्यास, लेख सभी में मेरी रूचि हैI मैं समझती हूँ कि आप वही बोलेंगे या लिखेंगे जितना कि आपको ज्ञान है इसलिए हर पल कुछ नया सीखने का प्रयास करती हूँ I मैंने कई कहानियाँ व कवितायेँ लिखी हैंI लेखन के अलावा मै अध्यापन कार्य भी करती हूँI हिंदी मेरा प्रिय विषय है, अधिकतर मैं हिंदी भाषा में ही लिखने का प्रयास करती हूँ मुझे अपनी मातृभाषा में लिखने से आत्म संतुष्टि मिलती हैI मेरे पास हिंदी साहित्य की पुस्तकों का अनूठा संगृह है, जिनसे मुझे आवश्यकता पड़ने पर सही मार्गदर्शन मिलता हैI

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